राष्ट्रवाणी (रायपुर ब्यूरो): मनोज कुमार दुबे, , रायपुर। मैं छत्तीसगढ़ हूं। मेरी पहचान केवल धान के कटोरे, घने जंगलों और खनिज संपदा से नहीं है।
मेरी मिट्टी में इतिहास की अनगिनत कहानियां दफन हैं। मैंने राजाओं के उत्थान और साम्राज्यों के पतन देखे हैं। मेरे जंगलों में संघर्ष की गूंज रही है, तो मेरी धरती पर मंदिरों और स्थापत्य कला ने सभ्यता की अमिट छाप छोड़ी है।
प्राचीन दक्षिण कोसल से लेकर आधुनिक भारत के एक महत्वपूर्ण राज्य बनने तक की मेरी यात्रा विरासत, वीरता और विकास की अनूठी गाथा है।

