राष्ट्रवाणी (कोरबा ब्यूरो): प्रतिनिधि, कोरबा। शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की कवायद अब हकीकत बनने वाली है। केंद्र सरकार से स्वीकृत 40 ई-बसों के संचालन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
नगर निगम दिसंबर से इन बसों को सड़कों पर उतारने की तैयारी में है। नई सेवा शुरू होने से न सिर्फ शहर बल्कि उपनगरीय इलाकों और पर्यटन स्थलों तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। केंद्र ने कोरबा जिले के लिए कुल 40 बसों को मंजूरी दी है, जिसमें 20 बड़ी ई-बसें और 20 ई-मिनी बसें शामिल हैं।
नगर निगम ने इनके लिए रूट चार्ट तैयार कर लिया है। सभी बसें रोजाना करीब 400 किलोमीटर तक शहरी और उपनगरीय क्षेत्रों में चलेंगी। एक बार फुल चार्ज होने पर एक बस लगभग 200 किलोमीटर का सफर तय कर सकेगी।
इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत होगा और निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी। ई-बस सेवा का सबसे बड़ा फायदा पर्यटन स्थलों तक आवाजाही में मिलेगा। सतरेंगा, मड़वारानी और कोसगाई जैसे प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट तक अब सार्वजनिक परिवहन से पहुंचा जा सकेगा।
इससे आम नागरिकों के साथ-साथ पर्यटकों को भी बड़ी राहत मिलेगी। सतरेंगा से लगे करीब 20 गांवों के लोगों के लिए शहर आना-जाना आसान होगा। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी।
नियमित बस सेवा से टूरिस्ट मूवमेंट बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित गतिविधियों और लोकल रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। शहर की संकरी सड़कों और कालोनियों को ध्यान में रखकर ई-मिनी बसों को शामिल किया गया है। ये बसें रविशंकर शुक्ल नगर, आरपी नगर, एमपी नगर और टीपी नगर के भीतरी मार्गों पर चलेंगी।
इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल और जरूरी जगहों तक पहुंचने में आसानी होगी। नगर निगम ने बांकीमोंगरा, दीपका, बालको और हरदीबाजार जैसे प्रमुख उपनगरीय क्षेत्रों को भी इस सेवा से जोड़ा है। प्रतीक्षा बस स्टेशन, पुराना बस स्टैंड और नया बस स्टैंड से नियमित सेवाएं चलेंगी।
रूट तय करते समय पीएम स्कूल, पीजी कालेज, कमला नेहरू महाविद्यालय, मिनीमाता महाविद्यालय, मेडिकल कालेज और रेलवे स्टेशन की कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई है, ताकि विद्यार्थियों और मरीजों को सीधा लाभ मिल सके। दर्री स्थित प्रतीक्षा बस स्टैंड में ई-बसों के लिए करीब 1.54 करोड़ रुपये की लागत से चार्जिंग सब स्टेशन बनाया जा रहा है।
इसका काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही बसों के मेंटेनेंस के लिए वर्कशॉप और प्रशासनिक भवन का निर्माण भी अंतिम दौर में है। भविष्य में इसी चार्जिंग स्टेशन पर अन्य इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर गाड़ियों को भी चार्ज करने की सुविधा देने की योजना है, जिससे शहर में ई-व्हीकल को बढ़ावा मिलेगा।
ई-बसें चलने से डीजल की खपत कम होगी और वायु प्रदूषण नियंत्रित होगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर होने से प्राइवेट गाड़ियों का इस्तेमाल भी घट सकता है, जिससे शहर का वातावरण स्वच्छ होगा। इस सेवा से नगर निगम को अतिरिक्त राजस्व मिलने की भी उम्मीद है।
संचालन, रखरखाव और प्रबंधन से लोकल स्तर पर रोजगार के अवसर भी बनेंगे। वहीं, कोरोना काल से पहले चल रही 48 पुरानी सिटी बसों की नीलामी की तैयारी की जा रही है, ताकि नई ई-बसों के लिए जगह बनाई जा सके। ई-बसों के संचालन की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
चार्जिंग सब स्टेशन लगभग तैयार है और प्रशासनिक भवन व वर्कशाप का निर्माण भी शीघ्र पूरा हो जाएगा। 40 ई-बसों में 20 ई-मिनी बसें शामिल हैं, जिनसे कालोनियों के भीतरी मार्गों पर संचालन आसान होगा। रूट चार्ट तैयार कर लिया गया है।
इसमें स्कूल, कालेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और निकटवर्ती कोयला क्षेत्रों के साथ पर्यटन स्थल सतरेंगा, मड़वारानी और कोसगाई को भी प्राथमिकता दी गई है। ई-बस सेवा शुरू होने के बाद शहरवासियों और ग्रामीणों को सुरक्षित, सस्ती एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा मिलेगी। -राकेश मसीह, कार्यपालन अभियंता, नगर निगम

