राष्ट्रवाणी: भारतीय पोल्ट्री उद्योग, विशेषकर अंडा निर्यात, ऊंची माल ढुलाई दरों और तुर्की से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण संकट का सामना कर रहा है। अंडे के विदेशी निर्यात पर बढ़ा फ्रेट चार्ज भारतीय पोल्ट्री निर्यात ऊंची माल ढुलाई दरों से प्रभावित। निर्यातक सरकार से सब्सिडी और शिपिंग सहायता चाहते हैं।
₹2000 करोड़ अंडा उद्योग संकट में, सरकारी मदद आवश्यक। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत की पोल्ट्री इंडस्ट्री इन दिनों कई समस्याओं का सामना कर रही है। इसमें से एक गंभीर समस्या निर्यात को लेकर है।
हालांकि मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण अप्रैल-मई 2026 के दौरान लगभग ठप हो गया भारत का पोल्ट्री निर्यात अब धीरे-धीरे सुधर रहा है। लेकिन बढ़ी हुई माल ढुलाई (फ्रेट) दरें निर्यातकों के मुनाफे पर दबाव बना रही हैं। इसके साथ ही इस क्षेत्र में तुर्की से तगड़ा कॉम्पटीशन भी मिल रहा है, जिससे भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है।
ऑल इंडिया पोल्ट्री प्रोडक्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव वल्सन परमेश्वरन ने मीडिया को बताया कि “फिलहाल मिलीजुली विदेशी मांग बनी हुई है और एक्सपर्ट्स को अभी कोई बड़ी बढ़ोतरी दिखाई नहीं दे रही है, हालांकि बाजार में सुधार के कुछ संकेत जरूर मिल रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि युद्ध के कारण शिपिंग सर्विस प्रभावित हो गई थी, जिससे अप्रैल में निर्यात लगभग ठप हो गया था।
उस समय करीब 120-125 कंटेनर फंस गए थे, जिन्हें मई के अंत या जून की शुरुआत तक क्लियर कर दिया गया। जून और जुलाई में निर्यात धीरे-धीरे सामान्य स्तर के 25-30 प्रतिशत तक पहुंचा। इसके बाद हर महीने इसमें लगभग 10 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई और अब यह सामान्य स्तर के करीब 50-55 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
परमेश्वरन ने कहा, “निर्यातक फिलहाल बेहतर स्थिति में नहीं हैं क्योंकि माल ढुलाई दरें चार गुना से अधिक बढ़ गई हैं। भारत से यूएई तक एक कंटेनर भेजने की लागत लगभग 1,900 डॉलर से बढ़कर 9,000 डॉलर तक पहुंच गई है। उन्होंने मीडिया को बताया कि हम सरकार से रिक्वेस्ट करते हैं कि वह शिपिंग कंपनियों के साथ बातचीत शुरू करे ताकि लागत कम हो और जहाजों की संख्या बढ़ाई जा सके।
साथ ही, बढ़े हुए फ्रेट खर्च की भरपाई के लिए किसी प्रकार की सब्सिडी भी दी जानी चाहिए।” उन्होंने कहा कि ऊंचे फ्रेट रेट के कारण नुकसान उठाने के बावजूद एक्सपोर्टर्स निर्यात जारी रखे हुए हैं ताकि बिजनेस चेन बनी रहे और कैश फ्लो जारी रहे, बुनियादी ढांचा और मैनफोर्स एक्टिव रहे और बाजार हिस्सेदारी सुरक्षित रह सके।
भारतीय पोल्ट्री उत्पादों, विशेषकर अंडों, के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सबसे बड़ा बाजार है।
