राष्ट्रवाणी: Raipur Prayas School Case | Photo Credit: एआई रायपुर: Raipur Prayas School Case राजधानी रायपुर के प्रयास संस्था (Raipur Prayas institution case) से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, यहां एक 13 साल के नाबालिग को बाहर निकाल दिया गया है। जिसके बाद अब इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।
अब इस मामले में संस्था का पक्ष भी सामने आया है। संस्था कि मुताबिक बच्चे का व्यवहार सहीं नहीं था। हॉस्टल अधीक्षक आशीष पांडेय के मुताबिक, उसका काउंसलर से काउंसिलिंग कराई गई थी।
Raipur Prayas School Case संस्था का कहना है कि वह अंधेरे में बैठता था और उसने कमरे में आकृति बनाई थी। उनके इस व्यवहार से हॉस्टल के अन्य बच्चे डरे हुए थे। जिसके बाद उनके परिजनों को सूचना देकर उन्हें बुलकार सारी बातों के बारे में जानकारी दी गई थी।
हॉस्टल अधीक्षक के मुताबिक, बच्चे को संस्था से निकालने के लिए प्रबंधन की ओर से दबाव नहीं बनाया गया था। उनका दावा है कि परिजनों ने ही बच्चे की टीसी लेने के लिए लिखित में आवेदन दिया था। पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भी दे दी गई है।
संस्था ने ये भी बताया कि हॉस्टल के अन्य बच्चे भी उसके व्यवहार को लेकर जानकारी दी है। बच्चों के मुताबिक, वह कथित तौर पर अनुचित तरीके से छता था और अश्लील बातें भी करता था। बच्चे ने यह भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने उसका गला दबाने की कोशिश की थी।
इसके अलावा संस्था का दावा है कि बच्चा अकेले कैमरे के सामने बैठकर हंसता और बड़बड़ाता रहता था। दूसरे बच्चों ने उसके व्यवहार को लेकर डर जाहिर किया था और बैड टच का भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है। दरअसल, संस्था के प्रबंधन पर आरोप लगा है कि उन्होंने 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 13 साल के एक मासूम छात्र को तांत्रिक क्रिया करने का आरोप लगाकर आधी रात में हॉस्टल से बाहर निकाल दिया है।
महासमुंद जिले के किसान के बेटे को आनन-फानन में टीसी थमा दी गई। परिजनों का गंभीर आरोप है कि संस्था की प्राचार्य ने उन्हें डरा-धमकाकर जबरन कागजों पर दस्तखत करवाए हैं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री शिकायत सेल में दर्ज करा दी गई है।
रायपुर के प्रयास संस्था में महज 14 दिन पहले 3 सितंबर को एक किसान के 13 साल के बेटे का एडमिशन हुआ था लेकिन अचानक प्रबंधन ने परिजनों को बुलाकर फरमान सुना दिया कि उनका बच्चा हॉस्टल में रात 2 बजे तक जागकर तांत्रिक क्रिया करता है। परिजनों का सवाल है कि जिस बच्चे का एडमिशन हुए दो हफ्ते भी नहीं हुए, उसके क्रियाकलापों का ऐसा आकलन प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के कैसे कर लिया?
बच्चे के माता-पिता का आरोप है कि उन्हें संस्था की प्राचार्य द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और डरा-धमकाकर जबरन कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। इसके बाद मासूम को हॉस्टल से बाहर निकाल कर उसके हाथ में टीसी थमा दी गई। इसके अलावा पूर्व में कभी भी प्रबंधन ने बच्चे को लेकर ऐसी कोई शिकायत परिजनों को सीधे या किसी भी माध्यम से नहीं की गई।
बल्कि परिजनों ने जब बच्चे पर लगे आरोप की पुष्टि हॉस्टल के बाकी बच्चों से करनी चाही तो हॉस्टल के बच्चों ने इस तरह के किसी भी कृत करने से इंकार कर दिया। संस्था के इस अमानवीय और अजीबोगरीब रवैए से आहत परिजन अब अपने बच्चे को लेकर महासमुंद लौट गए हैं। मासूम के उज्ज्वल भविष्य पर लगे इस झूठे दाग और प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ परिजनों ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
