न्यूयॉर्क/वाशिंगटन/जिनेवा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को शुल्क के इस्तेमाल को युद्ध रोकने का एक कारगर उपाय बताते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के हालिया संघर्ष के दौरान दोनों देशों के साथ उनका संवाद ”काफी प्रभावी” रहा. उन्होंने व्यापार का इस्तेमाल कर परमाणु हथियारों से लैस दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त कराने के अपने दावे को दोहराया.
ट्रंप ने सोमवार को ‘ओवल ऑफिस’ (व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यालय) में कहा, ”अमेरिका के लिए शुल्क बहुत महत्वपूर्ण हैं. इससे हम न सिर्फ अरबों डॉलर कमाते हैं, बल्कि शुल्क की वजह से ही हम शांतिदूत भी बन गए हैं.” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर उन्होंने ”शुल्क की ताकत” का इस्तेमाल नहीं किया होता तो चार युद्ध अब भी जारी रहते.
ट्रंप ने कहा, ”मैं युद्ध रोकने के लिए शुल्क का इस्तेमाल करता हूं. अगर आप भारत और पाकिस्तान को देखें, तो वे युद्ध के लिए तैयार थे. सात विमान मार गिराए गए थे. वे परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं.” उन्होंने कहा, ”मैं यह नहीं बताना चाहता कि मैंने दरअसल क्या कहा, लेकिन मैंने जो कहा वह बहुत प्रभावी था. उन्होंने संघर्ष रोक दिया और यह शुल्क की वजह से हुआ था. इसका आधार व्यापार था.” भारत ने इस मामले में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की बात से लगातार इनकार किया है. भारत ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के जवाब में सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत की थी. पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे.
भारत और पाकिस्तान चार दिन तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद 10 मई को संघर्ष समाप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंचे थे. भारत लगातार कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ शत्रुता समाप्त करने पर सहमति दोनों सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में स्पष्ट किया था कि किसी भी देश के नेता ने भारत से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोकने के लिए नहीं कहा.
हालांकि, ट्रंप ने कई बार दोहराया है कि उन्होंने अपने प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में अब तक सात युद्ध समाप्त किए हैं, जिनमें भारत और पाकिस्तान का संघर्ष, कंबोडिया और थाईलैंड, कोसोवो और र्सिबया, कांगो और रवांडा, इजराइल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया तथा आर्मेनिया और अजरबैजान के युद्ध शामिल हैं.
स्वास्थ्य समझौते पर बातचीत को तैयार हूं लेकिन पहले सरकार को काम शुरू करने दें : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को छठे दिन भी ‘शटडाउन’ जारी रहने पर डेमोक्रेट्स के साथ स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी पर वार्ता की संभावना जतायी लेकिन कुछ ही देर बाद इसे खारिज कर दिया, जिससे फिर गतिरोध पैदा हो गया है. डेमोक्रेट्स अल्पकालिक वित्तीय योजना का समर्थन इस शर्त पर कर रहे हैं कि ”ओबामाकेयर” के तहत दी जाने वाली स्वास्थ्य सब्सिडी को जारी रखा जाए.
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, ”हमारी डेमोक्रेट्स से बातचीत चल रही है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में अच्छे परिणाम ला सकती है.” सरकार का कामकाज ठप होने के छठे दिन यह टिप्पणी उम्मीद की एक किरण के रूप में आई, लेकिन बाद में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पहले डेमोक्रेट्स को सरकार को दोबारा काम शुरू करने देना होगा, उसके बाद ही स्वास्थ्य नीति पर चर्चा हो सकती है.
उन्होंने कहा, ”मैं डेमोक्रेट्स के असफल स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर बात करने को तैयार हूं, लेकिन पहले वे सरकार के कामकाज को चालू करें.” वहीं, डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर और हकीम जेफ्रीज ने कहा कि ट्रंप के दावे गलत हैं और पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस की बैठक के बाद से कोई वार्ता नहीं हुई है.
शूमर ने कहा, ”अगर ट्रंप वाकई बातचीत के लिए तैयार हैं, तो हम उसके लिए मौजूद रहेंगे.” सीनेट में सोमवार को सरकार का कामकाज बहाल करने के लिए दो प्रस्ताव रखे गए, लेकिन दोनों ही विफल रहे क्योंकि उन्हें 60 मत नहीं मिले. दोनों दलों ने एक-दूसरे पर गतिरोध खत्म न करने का आरोप लगाया.
अमेरिका में फिलहाल ‘शटडाउन’ लागू है, जिसमें सरकारी वित्तपोषण पर रोक है. ‘शटडाउन’ को खत्म करने के लिए संसद के दोनों सदनों, सीनेट और प्रतिनिधि सभा में सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच सहमति नहीं बन पाई है.
डेमोक्रेटिक पार्टी स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी जारी रखने की मांग कर रही है, जबकि ट्रंप मौजूदा खर्च के स्तर को बनाए रखना चाहते हैं. उनका तर्क है कि नौकरियों और परियोजनाओं पर खतरे के चलते डेमोक्रेट्स अंतत? झुकेंगे. इस राजनीतिक टकराव के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गयी है.
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करती है अमेरिकी निर्वासन प्रक्रिया: यूएनएचसीआर
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) के प्रमुख ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की निर्वासन प्रक्रियाएं अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं. इसके साथ ही उन्होंने कुछ देशों में प्रवासियों और शरणार्थियों के खिलाफ बढ़ते व्यापक ‘विरोध’ की भी आलोचना की.” संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के लिए उच्चायुक्त फिलिपो ग्रैंडी ने दु?ख व्यक्त करते हुए कहा कि भारी धन कटौती के चलते उनकी एजेंसी यूएनएचसीआर को इस साल लगभग 5,000 नौकरियां यानी अपने कार्यबल के एक चौथाई हिस्से में कटौती करनी पड़ी है. उन्होंने कहा कि संभव है कि यह कटौती आगे भी जारी रहे.
ग्रैंडी ने यूएनएचसीआर की कार्यकारी समिति के उद्घाटन के मौके पर कहा, ”यह साल निश्चित तौर पर हम में से किसी के लिए भी आसान नहीं रहा है लेकिन कृपया याद रखें शरणार्थी के लिए कभी कोई साल आसान नहीं रहा है और न कभी रहेगा.” हालांकि, उन्होंने कुछ अच्छी बातें भी बताईं और कांगो में ट्रंप प्रशासन की तरफ से किए जा रहे शांति प्रयासों की तारीफ की. कांगो एक ऐसा देश है, जहां लगातार जारी संघर्ष के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है.
