राष्ट्रवाणी: मुंबई का मशहूर माहिम हलवा, जो पतली परतों के लिए जाना जाता है, उसकी कहानी मछली और तुर्की कैंडी से जुड़ी है। मुंबई का मशहूर माहिम हलवा (Image Source: एआई Generated) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपने सूजी, मूंग दाल, आटे और आलू जैसे कई चीजों का हलवा खाया होगा, पर आज हम जिस हलवे की कहानी सुनने जा रहे है, उसका इतिहास हलवे से नहीं एक मछली और कैंडी से जुड़ा है।
इसमें भी सबसे दिलचस्प बात यह कि इसके बावजूद यह डिश शुद्ध वेजिटेरियन है। ये सारी बातें आपको कन्फ्यूज जरूर कर रही होंगी कि आखिर बात किसकी हो रही है हलवे की, मछली की या कैंडी की, तो चलिए आपकी यह कन्फ्यूजन दूर करते हुए मुंबई के मशहूर माहिम हलवे का इतिहास बताते हैं। वैसे तो मिठाई बनाने की शुरुआत माओजी जोशी नामक शख्स ने की थी, जिन्होंने काम की तलाश में गुजरात के द्वारका से मुंबई तक का सफर तय किया था।
पर इस कारोबार को ऊंचाइयों पर पहुंचाने का श्रेय उनके बेटे गिरिधर जोशी को जाता है। कहते हैं शुरू-शुरू में गिरधर सिर्फ मोहनथाल और लड्डू ही बेचते थे, लेकिन एक बार तुर्की के किसी यात्री ने उन्हें ‘लोकुम’ नाम की कैंडी का स्वाद चखाया। यहीं से माहिम हलवे के बनने की कहानी शुरू हुई, क्योंकि उस कैंडी के स्वाद के बाद गिरधर एक अलग मिठाई बनाने में लग गए।
कहते हैं इसे इन्वेन्ट करने में उन्हें करीब 20 साल लगे और आखिरकार एक दिन दूध की पतली परत से माहिम हलवे का आविष्कार हुआ। अब आप सोच रहे होंगे कि जब यह एक मिठाई है और इसका कैंडी से कनेक्शन था, फिर इसके साथ मछली और हलवे का नाम कैसे जुड़ा? तो बता दें कि मुंबई के माहिम इलाके में ब्लैक पोमफ्रेट मछली का स्थानीय नाम हलवा है।
कहते हैं कि एक दिन जब किसी मछुआरन ने इस मिठाई को चखा तो कहा कि इसका स्वाद हलवा मछली से भी स्वादिष्ट है। तभी से इस मिठाई को माहिम हलवा कहा जाने लगा और इसी नाम से यह दुनियाभर में भी मशहूर हुई। इस मिठाई को दूध की एकदम पतली पेपर जैसी परत से बनाया जाता है।
जिसमें दूध के साथ ही इलायची, चीनी, देसी घी, फूड कलर और मेवों का मिश्रण भी शामिल होता है। इसकी महीन लेयर की वजह से ही मिठाई को पेपर हलवा और मुंह में घुल जाने के चलते आइस हलवा भी नाम दिया गया है।

