राष्ट्रवाणी: त्वचा पर अचानक जलन, चुभन और दर्द के साथ छोटे-छोटे दाने या फफोले निकलें तो अक्सर इसे एक सामान्य स्किन प्रॉब्लम समझ लिया जाता है. लेकिन अगर ये लक्षण शिंगल्स यानी हर्पीज जोस्टर की वजह से हैं, तो मामला सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं माना जाता. रिसर्च में शिंगल्स के बाद स्ट्रोक और हार्ट संबंधी घटनाओं के बढ़े हुए खतरों के बीच संबंध देखा गया है. खासतौर पर संक्रमण के बाद शुरुआती दिनों और हफ्तों को महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में जानिए आखिर शिंगल्स होता क्या है और इसकी वजह से कैसे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है. शिंगल्स उसी वायरस से होता है जो चिकनपॉक्स का कारण बनता है. इसे वैरिसेला-जोस्टर वायरस कहा जाता है. चिकनपॉक्स ठीक होने के बाद वायरस शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं होता, बल्कि नर्व सेल्स में निष्क्रिय अवस्था में रहता है. वर्षों बाद जब इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है या उम्र बढ़ती है, तो यही वायरस दोबारा सक्रिय होकर शिंगल्स का कारण बन जाता है. इसमें आमतौर पर शरीर या चेहरे के एक हिस्से पर दर्द, जलन, खुजली या झुनझुनी के बाद फफोले निकलते हैं. दाने अक्सर शरीर की एक तरफ नसों के रास्ते में दिखाई देते हैं. फफोले कुछ दिनों में पपड़ी में बदलते हैं और करीब 2 से 4 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं. शिंगल्स की सबसे आम मुसिबतों में पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया यानी लंबे समय तक रहने वाला नसों का दर्द शामिल है. शिंगल्स से गुजरने वाले करीब 10 से 18 परसेंट लोगों में यह समस्या हो सकती है और उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है. कुछ लोगों में दाने ठीक होने के बाद भी प्रभावित हिस्से में महीनों या कभी-कभी वर्षों तक दर्द बना रहता है. अगर संक्रमण चेहरे या आंख के आसपास हो, तो आंखों और नजर पर भी असर पड़ सकता है. दुर्लभ मामलों में वायरस मस्तिष्क में सूजन यानी एन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या भी पैदा कर सकता है. कई स्टडी में हर्पीज जोस्टर के बाद स्ट्रोक के जोखिम में बढ़ोतरी देखी गई है. संक्रमण के शुरुआती समय में जोखिम अधिक दिखाई देता है. रिसर्चर्स के अनुसार इसका एक कारण वायरस से जुड़ी रक्त-नलिकाओं की सूजन या वैस्कुलोपैथी हो सकती है. रिसर्च में शिंगल्स और हार्ट अटैक समेत अन्य कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं के बीच भी संबंध सामने आया है. कुछ स्टडीज में स्ट्रोक और कोरोनरी हार्ट डिजीज के जोखिम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. भारत में शिंगल्स से बचाव का सबसे असरदार और मुख्य तरीका टीकाकरण करवाना है. यह टीका वायरस को दोबारा सक्रिय होने से रोकता है और इसके गंभीर दर्द के जोखिम को कम करता है. अगर घर में किसी को शिंगल्स हुआ है, तो उनके फफोलों या दानों को सीधे छूने से बचें और रैशेज को साफ और ढंक कर रखें. वहीं समस्या बढ़ने से पहले ही डॉक्टर को दिखाना फायदेमंद होता है. Check out below Health Tools-Calculate Your Body Mass Index ( BMI ) Calculate The Age Through Age Calculator जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
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