राष्ट्रवाणी: ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफ़रीज़ के क्रिस वुड के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव अमेरिकी मध्यावधि चुनावों तक जारी रहने की संभावना है और कच्चे तेल में बड़ी तेजी अभी नहीं आई है। जेफ़रीज़ के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस वुड ईरान-अमेरिका तनाव अमेरिकी मध्यावधि चुनावों तक जारी रहेगा।
लाल सागर में जोखिम बढ़ा, पर तेल कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ीं। चीन की भूमिका कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित कर रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान एक डील पर विचार कर रहा था, लेकिन वुड का मानना है कि ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक अमेरिका MOU के आधार पर बातचीत नहीं करता।
मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में वुड ने कहा, “मेरा मानना है कि यह गतिरोध मिड-टर्म चुनावों तक जारी रहेगा।” क्रिस वुड ने कहा कि रेड सी में हाल की घटनाओं ने जोखिम को और बढ़ा दिया है। हैरानी की बात बस यही है कि तेल की कीमतें बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ी हैं। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे इस तनाव और महत्वपूर्ण ऑयल रूट, Strait of Hormuz पर मंडराते खतरे के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जो तेल की कीमतों में भारी उछाल ला सकती है।
वुड ने कहा कि एनर्जी शॉक का असर कच्चे तेल की मुख्य कीमत के मुकाबले रिफ़ाइन किए गए प्रोडक्ट्स पर ज़्यादा साफ़ दिख रहा है। वुड ने यूरोप में गैस की कीमतों का भी उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जर्मनी और UK में गैस की कीमतें US के मुकाबले 10 गुना ज़्यादा हैं, जो एनर्जी शॉक की वजह से असल दुनिया में हो रही परेशानी को दिखाता है।
वुड ने कहा कि तेल की कीमतें कितनी बढ़ेंगी, यह तय करने में चीन अहम भूमिका निभा सकता है। चीन के पास तेल का बड़ा स्टॉक है और उसने हाल के महीनों में कम तेल खरीदा है; वुड के अनुसार, यही एक वजह है कि कीमतें और ज़्यादा नहीं बढ़ी हैं।
