नयी दिल्ली. कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपनी ”तुच्छ राजनीति” के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल को ”गलत तरीके से उद्धृत नहीं करना चाहिए.” मुख्य विपक्षी दल ने प्रधानमंत्री की उस टिप्पणी को लेकर उन पर पलटवार किया कि यह पटेल की इच्छा थी कि सशस्त्र बल को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को वापस लेने तक नहीं रुकना चाहिए, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया.

कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने पटेल द्वारा एन गोपालस्वामी अयंगर (नेहरू सरकार में रक्षा मंत्री) को लिखे गए एक पत्र को ‘एक्स’ पर साझा किया और कहा कि पटेल के शब्द उस समय की सैन्य वास्तविकताओं को देखते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बारे में उनकी सावधानी को स्पष्ट करते हैं. इस सप्ताह की शुरुआत में गांधीनगर में बोलते हुए, मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया था.

उन्होंने कहा, “1947 में, जब मां भारती का विभाजन हुआ, ‘कटनी चाहिए थी जंजीरें पर काट दी गई भुजाएं’. देश तीन हिस्सों में बंट गया. उसी रात कश्मीर में पहला आतंकवादी हमला हुआ.” प्रधानमंत्री ने कहा, ”पाकिस्तान ने मुजाहिदीन के नाम पर आतंकवादियों का इस्तेमाल कर मां भारती के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया था. अगर उस दिन ये मुजाहिदीन मारे जाते और सरदार पटेल की इच्छा थी कि जब तक हम पीओके को वापस नहीं ले लेते, तब तक हमारे सशस्त्र बल नहीं रुकेंगे. लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और अब, हम पिछले 75 वर्षों से इस (आतंकवाद) का सामना कर रहे हैं. पहलगाम भी इसका एक विकृत रूप था.”

खेड़ा ने कहा, ”हमारे प्रधानमंत्री को यह बताते हुए मुझे खुशी हो रही है कि 4 जून, 1948 को सरदार पटेल ने देहरादून से एन गोपालस्वामी अय्यंगर को एक पत्र लिखा था: ‘सैन्य स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, और मुझे डर है कि हमारे सैन्य संसाधन सीमित हैं. हमें इस दुर्भाग्यपूर्ण मामले को कब तक जारी रखना होगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है.” खेड़ा ने कहा, ”हममें से जो लोग तथ्यों की परवाह करते हैं, उनके लिए सरदार पटेल के शब्द उस समय की सैन्य वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए पीओके के बारे में उनकी गहन सावधानी को स्पष्ट करते हैं. जहां तक ??मोदी जी का सवाल है, जिन्होंने कभी भी सच्चाई की परवाह नहीं की है, उन्हें नफरत और विभाजन की अपनी तुच्छ राजनीति के लिए सरदार पटेल जैसे कांग्रेस राजनेताओं को गलत तरीके से उद्धृत करना, दुरुपयोग करना बंद करना चाहिए.”

अर्थव्यवस्था के आकार पर बयानों के बीच खपत धीमी और निवेश की गति स्थिर: कांग्रेस

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि नीति आयोग के पदाधिकारियों द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार को लेकर दिए जा रहे बयानों के बीच देश में खपत धीमी है और निवेश की गति बढ़ नहीं रही है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”सबसे पहले नीति आयोग के सीईओ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार पर दावा किया जो जाहिर तौर पर जापान से बड़ा हो चुका ‘जैसा कि वह बोल रहे थे.’ उसके बाद नीति आयोग का एक सदस्य अपने सीईओ का खंडन करता है और अधिक यथार्थवादी तस्वीर पेश करता है.”

उन्होंने कहा, “अब नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने पूरी तरह से अलग रुख अपनाते हुए कहा कि उनके सहयोगी तुलना के लिए गलत मानक का उपयोग कर रहे थे और वास्तव में भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही अमेरिका के आकार की आधी है.” रमेश ने कहा, “अकेले अर्थव्यवस्था के आकार पर यह निर्धारण मदद नहीं कर रहा है. इसे सुर्खियां मिलती हैं लेकिन इस बीच खपत धीमी है और निवेश की गति बढ़ नहीं रही है.” नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के संदर्भ में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार पहले से ही 15,000 अरब डॉलर है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आधे से भी अधिक है.

क्रय शक्ति समता (पीपीपी) का उपयोग विभिन्न देशों के बीच मुद्राओं के सापेक्ष मूल्य की तुलना करने के लिए किया जाता है. बाजार विनिमय दर का उपयोग करने के बजाय, पीपीपी उन वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा पर ध्यान केंद्रित करता है जिन्हें प्रत्येक देश में मुद्रा की एक निश्चित राशि के साथ खरीदा जा सकता है.

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