राष्ट्रवाणी: World Stroke Day Symptoms And Awareness: हर साल 29 अक्टूबर को वर्ल्ड स्ट्रोक डे मनाया जाता है. इस दिन का मकसद स्ट्रोक को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इसके लक्षणों को समय रहते पहचानने के महत्व को समझाना है. आज के समय में लोग अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए स्मार्टवॉच और दूसरे वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल भी कर रहे हैं. ये डिवाइस हार्ट रेट, नींद, ब्लड ऑक्सीजन और हार्ट रिदम जैसी चीजों की जानकारी देती हैं. लेकिन क्या स्मार्टवॉच की नॉर्मल रीडिंग यह बता सकती है कि व्यक्ति को स्ट्रोक नहीं हो रहा है?
इसका जवाब है नहीं. सीके बिड़ला अस्पताल, गुरुग्राम के सीनियर कंसल्टेंट-न्यूरोलॉजी डॉ. मोहित आनंद के मुताबिक, स्मार्टवॉच को पूरी सेहत की जांच करने वाले उपकरण की तरह नहीं देखना चाहिए. यह शरीर के कुछ खास संकेतों को मापती है, लेकिन हर मेडिकल इमरजेंसी का पता लगाने के लिए डिजाइन नहीं की गई है. नॉर्मल हार्ट रेट से क्यों नहीं पता चलता स्ट्रोक?
स्मार्टवॉच मुख्य रूप से शरीर से जुड़े कुछ संकेतों को ट्रैक करती है, जिनमें हार्ट रेट और कुछ डिवाइस में हार्ट रिदम भी शामिल है. कुछ स्मार्टवॉच अनियमित हार्ट रिदम जैसे संभावित एट्रियल फिब्रिलेशन की ओर भी इशारा कर सकती हैं. ऐसी स्थिति स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी हो सकती है और इस तरह का अलर्ट मिलने पर व्यक्ति डॉक्टर से सलाह ले सकता है. लेकिन स्ट्रोक सिर्फ हार्ट रेट से जुड़ी समस्या नहीं है. यह तब हो सकता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में ब्लड फ्लो क्लॉट की वजह से रुक जाए या ब्रेन की कोई ब्लड वेसल्स फट जाए और ब्लीडिंग होने लगे. जरूरी नहीं कि इन दोनों स्थितियों में हार्ट रेट असामान्य हो. इसलिए किसी व्यक्ति की स्मार्टवॉच पर हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दिख रहा हो, तब भी उसे स्ट्रोक हो सकता है. यह संख्या उस समय की हार्ट रेट तो बता सकती है, लेकिन इससे यह तय नहीं किया जा सकता कि मस्तिष्क के हर हिस्से तक पर्याप्त ब्लड पहुंच रहा है या नहीं. स्टेप काउंट और स्लीप स्कोर भी नहीं देते पूरी जानकारी यही बात स्टेप काउंट, स्लीप स्कोर और दूसरी वेलनेस रीडिंग पर भी लागू होती है. ये आंकड़े आपकी दिनचर्या और आदतों को समझने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनसे यह साबित नहीं होता कि मस्तिष्क सामान्य रूप से काम कर रहा है. स्मार्टवॉच का असली फायदा लंबे समय के पैटर्न को देखने में है. रेस्टिंग हार्ट रेट, एक्टिविटी लेवल और नींद के पैटर्न में लगातार होने वाले बदलावों पर नजर रखकर व्यक्ति किसी चिंता की स्थिति में डॉक्टर से बात कर सकता है. हालांकि इन बदलावों को सही तरीके से समझना जरूरी है. कुछ स्मार्टवॉच में मौजूद ईसीजी फीचर भी कुछ खास हार्ट रिदम से जुड़ी असामान्यताओं के संकेत दे सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह की हार्ट जांच या स्ट्रोक टेस्ट नहीं माना जा सकता. इसी तरह ब्लड ऑक्सीजन की रीडिंग से यह पुष्टि नहीं होती कि मस्तिष्क तक पर्याप्त ब्लड फ्लो पहुंच रहा है. स्मार्टवॉच की रीडिंग हमेशा बिल्कुल सही हो, यह जरूरी नहीं है. ढीला स्ट्रैप, शरीर की हलचल, सेंसर का सही संपर्क न होना और तकनीक की अपनी सीमाएं रीडिंग को प्रभावित कर सकती हैं. इसके अलावा कोई रीडिंग सही भी हो, तब भी वह सिर्फ उसी चीज की जानकारी देती है जिसे डिवाइस माप रही है. इससे व्यक्ति की पूरी मेडिकल स्थिति का पता नहीं चलता. वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें स्ट्रोक के सबसे महत्वपूर्ण संकेत अक्सर चेहरे, हाथ-पैर, बोलने, देखने या शरीर के संतुलन में बदलाव के रूप में सामने आते हैं. स्मार्टवॉच की स्क्रीन सामान्य दिखने के बावजूद वह इन न्यूरोलॉजिकल बदलावों को भरोसेमंद तरीके से खारिज नहीं कर सकती. चेहरे का अचानक एक तरफ झुकना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, खासकर शरीर के एक हिस्से में, बोलने या बात समझने में परेशानी, अचानक नजर से जुड़ी समस्या, संतुलन बिगड़ना या बिना वजह तेज सिरदर्द जैसे लक्षण मेडिकल इमरजेंसी का संकेत हो सकते हैं. हर व्यक्ति में स्ट्रोक के लक्षण एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है. अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो स्मार्टवॉच पर सामान्य हार्ट रेट दिखने या कोई अलर्ट नहीं आने के बावजूद तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए. अगर संभव हो तो लक्षण शुरू होने का समय या वह आखिरी समय जब व्यक्ति बिल्कुल सामान्य था, उसे नोट करना चाहिए. कुछ मामलों में लक्षण कुछ मिनट बाद गायब भी हो सकते हैं. इसके बावजूद तुरंत जांच जरूरी है, क्योंकि ऐसा ट्रांजिएंट इस्कीमिक अटैक यानी टीआईए का संकेत हो सकता है, जिसे आम तौर पर मिनी-स्ट्रोक कहा जाता है. स्मार्टवॉच पहनना बंद करने की जरूरत नहीं है. जरूरत सिर्फ इस बात को समझने की है कि इसकी जानकारी किस हद तक उपयोगी है. स्मार्टवॉच से मिलने वाले अलर्ट को डॉक्टर से सलाह लेने के संकेत की तरह देखना चाहिए, किसी बीमारी की पक्की जांच की तरह नहीं. हार्ट रेट में लगातार बदलाव या बार-बार अनियमित हार्ट रिदम के नोटिफिकेशन मिलने पर डॉक्टर से बात करना जरूरी है. वहीं, स्मार्टवॉच पर कोई अलर्ट नहीं आ रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ ठीक है. नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, संतुलित खान-पान और ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और धूम्रपान जैसे स्ट्रोक के जोखिम से जुड़े पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है. स्मार्टवॉच स्वस्थ आदतों को बनाए रखने में मदद कर सकती है, लेकिन यह डॉक्टर की सलाह और नियमित स्वास्थ्य देखभाल की जगह नहीं ले सकती. Check out below Health Tools-Calculate Your Body Mass Index ( BMI ) Calculate The Age Through Age Calculator सोनम एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. यहां वह लाइफस्टाइल कैटिगरी और इसके अंतर्गत आने वाली सब-कैटिगरीज हेल्थ, होम टिप्स, रिलेशनशिप, ट्रैवल, पैरेंटिंग, ब्यूटी और फैशन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. सोनम करीब 15 साल से लेखन की दुनिया में कार्यरत हैं. इससे पहले वह , के आईनेक्स्ट में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. इन सभी जगहों पर उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. सोनम ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन किया है. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

