राष्ट्रवाणी: पूरी का नाम सुनते ही गर्मागर्म, फूली हुई और करारी पूरियों का ख्याल आता है. लेकिन इन्हें घर पर बनाते समय एक आम परेशानी रहती है. कई लोगों की यह समस्या होती है कि पूरी स्वादिष्ट तो बन जाती है, लेकिन उसमें जरूरत से ज्यादा तेल समा जाता है. खासकर जब पूरी तलने के बाद प्लेट में रखने पर भी तेल बाहर निकलता दिखाई दे, तो खाने का मजा थोड़ा कम हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है?
पूरी के ज्यादा तेल सोखने की वजह सिर्फ आटा नहीं होता. आटे की नमी, उसकी सख्ती, पूरी की मोटाई और तेल का तापमान इन सभी का असर पड़ता है. अगर तेल पर्याप्त गर्म नहीं है तो पूरी ज्यादा देर तक तेल में रहती है और ज्यादा तेल सोख लेती है. वहीं बहुत ज्यादा गर्म तेल में पूरी का बाहरी हिस्सा जल्दी भूरा हो जाता है, जबकि अंदर से सही तरह पकने में दिक्कत हो सकती है. इसलिए सही संतुलन सबसे जरूरी है. पूरी का आटा रोटी के आटे की तुलना में थोड़ा सख्त रखा जाता है. अगर आटा बहुत नरम होगा तो उसमें नमी ज्यादा रहेगी और पूरी तलते समय अधिक तेल सोख लेगी. वहीं बहुत ज्यादा सख्त आटे से पूरी बेलना मुश्किल हो सकता है और वह अच्छी तरह फूल भी नहीं पाएगी. ऐसे में आटा गूंथते समय पानी धीरे-धीरे डालें. इसे अच्छी तरह मसलकर चिकना करें और कुछ देर ढककर रख दें. इससे आटे की बनावट बेहतर होगी और बेलते समय ज्यादा सूखा आटा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पूरी के आटे में थोड़ा तेल या घी मिलाने से उसकी बनावट बेहतर हो सकती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा मोयन डालना सही नहीं है. बहुत अधिक तेल या घी डालने से आटा जरूरत से ज्यादा मुलायम हो जाता है और पूरी का टेक्सचर भी बदल जाता है. इसलिए मोयन डालने के बाद आटे को अच्छी तरह मिलाएं. मुट्ठी में दबाने पर अगर आटा हल्का बंधने लगे, तो समझ सकते हैं कि मोयन अच्छी तरह मिल गया है. पूरी बेलते समय सबसे जरूरी है कि उसकी मोटाई एक जैसी रहे. बहुत पतली पूरी तेल में जल्दी सख्त हो सकती है, जबकि बहुत मोटी पूरी अंदर से कच्ची रहने का खतरा रहता है. बेलते समय ज्यादा सूखा आटा लगाने के बजाय हल्का तेल इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है. इससे अतिरिक्त सूखा आटा तेल में जलकर काले कण बनने की समस्या भी नहीं होती. कम तेल सोखने वाली पूरी के लिए तेल का सही तापमान सबसे महत्वपूर्ण है. अगर तेल ठंडा या कम गर्म है, तो पूरी तुरंत सिकुड़ने के बजाय तेल में बैठी रहेगी और अधिक तेल अंदर चला जाएगा. वहीं तेल पर्याप्त गर्म होने पर पूरी डालें. पूरी डालने के बाद आंच को जरूरत के अनुसार नियंत्रित करें, ताकि तेल का तापमान बहुत नीचे न जाए. एक साथ बहुत सारी पूरियां डालने से भी तेल का तापमान अचानक कम हो जाता है, इसलिए कड़ाही के आकार के हिसाब से ही पूरियां तलें. पूरी तेल में डालने के बाद झारे या कलछी से हल्का दबाने पर वह फूलने लगती है. इससे पूरी का आकार अच्छा बनता है और वह समान रूप से तल जाती है. हालांकि इसे लगातार दबाते या पलटते रहने की जरूरत नहीं है. जब नीचे की तरफ हल्का सुनहरा रंग दिखाई देने लगे, तो इसे पलट दें और दूसरी तरफ भी तल लें. बहुत देर तक तेल में रखने से पूरी जरूरत से ज्यादा कुरकुरी और तैलीय हो सकती है. पूरी तलने के बाद उसे सीधे प्लेट में रखने के बजाय कुछ सेकंड झारे पर रोककर अतिरिक्त तेल निकलने दें. इसके बाद इसे टिश्यू पेपर या साफ किचन पेपर पर रखें. इससे सतह पर मौजूद अतिरिक्त तेल कम हो जाएगा. अगर आप एक साथ कई पूरियां बना रहे हैं, तो उन्हें बहुत देर तक बंद डिब्बे में रखने से बचें. भाप के कारण उनकी कुरकुराहट कम हो सकती है. निर्जला गौड़ इस वक्त ABP Live की लाइफस्टाइल डेस्क पर इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं. वह मंदसौर यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में अपनी डिग्री कर रही हैं. इससे पहले वह EBNW Stories में कंटेंट राइटर के तौर पर इंटर्नशिप कर चुकी हैं. डिजिटल जर्नलिज्म और कंटेंट क्रिएशन में उनकी खास रुचि है. आसान, आकर्षक और रिलेटेबल अंदाज में कहानियों को पेश करना और पाठकों तक जानकारी को प्रभावी तरीके से पहुंचाना उनकी खासियत है. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.

