राष्ट्रवाणी: दुनियाभर में पुरुषों के स्पर्म काउंट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, 1973 से 2018 के बीच यह 51.6% कम हुआ है, भारत में भी स्थिति चिंताजनक है। पुरुषों में तेजी से घट रहा स्पर्म काउंट (Image Source: एआई-Generated) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
आज के समय में स्पर्म काउंट में होने वाली गिरावट एक बहुत बड़ी वैश्विक चिंता बन गई है। इसका सीधा असर पुरुषों की फर्टिलिटी पर पड़ रहा है। बता दें, स्पर्म काउंट कम होने का मतलब यह नहीं है कि पुरुष पिता नहीं बन सकता, लेकिन हां यह फर्टिलिटी की संभावनाओं को काफी कमजोर जरूर कर देता है।
साल 2023 में पब्लिश हुई एक बड़ी रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। इस स्टडी के मुताबिक, 1973 से 2018 के बीच दुनिया भर में पुरुषों के स्पर्म काउंट में 51.6% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। चिंता की बात यह है कि साल 2000 के बाद से यह गिरावट और भी तेज हो गई है।
यही वजह है कि आज के समय में फर्टिलिटी रेट कम हो रहे हैं और आईवीएफ जैसी तकनीकों का सहारा लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत भी इस समस्या से अछूता नहीं है। साल 2018 में 13,486 भारतीय पुरुषों के डेटा पर की गई एक स्टडी में भी यही बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पुरुषों में भी स्पर्म की क्वालिटी और संख्या में काफी कमी आई है, खासकर उन पुरुषों में जो पहले से इन्फर्टिलिटी का सामना कर रहे हैं। इस गिरावट के पीछे किसी एक नहीं, बल्कि कई चीजों का हाथ है: इस समस्या से बचने के लिए अपनी जीवनशैली में सुधार करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
अपना वजन कंट्रोल में रखें, बैलेंस डाइट लें, रोज एक्सरसाइज करें और भरपूर नींद लें। तंबाकू और हर तरह के नशे से दूरी बनाएं और शराब का सेवन कम से कम करें। इसके अलावा, खुद को जहरीले रसायनों और अत्यधिक गर्मी से बचाकर रखें।
एक बड़ी चेतावनी यह भी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के कभी भी टेस्टोस्टेरोन थेरेपी या स्टेरॉयड का इस्तेमाल न करें। ये चीजें स्पर्म बनने के प्राकृतिक हार्मोनल सिग्लन को रोक देती हैं, जिससे स्पर्म काउंट बहुत ज्यादा गिर सकता है या स्पर्म पूरी तरह खत्म भी हो सकते हैं। पुरुषों की फर्टिलिटी जांचने का सबसे पहला और मुख्य तरीका ‘सीमन एनालिसिस’ है।
अगर बिना किसी गर्भनिरोधक के 12 महीने तक कोशिश करने के बाद भी प्रेग्नेंसी नहीं हो रही है, तो पुरुषों को अपनी जांच जरूर करवानी चाहिए। वहीं, अगर महिला पार्टनर की उम्र 35 साल या उससे ज्यादा है, तो यह जांच 6 महीने बाद ही करवा लेनी चाहिए। अगर आपको पहले से कोई बीमारी या जोखिम है, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें।
जांच की रिपोर्ट में गड़बड़ी आने पर तुरंत किसी यूरोलॉजिस्ट या एंड्रोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर जांच और बेहतर लाइफस्टाइल की मदद से इस समस्या को पहचाना और सुधारा जा सकता है। (डॉ. शालिनी चावला खन्ना, मैक्स मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल (पंचशील पार्क) के आईवीएफ और रिप्रोडक्टिव मेडिसिन विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर हैं)

