राष्ट्रवाणी: अफैंटेशिया में कुछ लोगों के ब्रेन में किसी वस्तु की धुंधली या फिर बिलकुल ही इमेज नहीं बन पाती। यह बीमारी ना होते हुए भी परेशानीभरा अनुभव हो सकता है। जब दिमाग में न बने किसी चीज की तस्वीर, जानें इसके प्रकार और कारण (Picture Credit- एआई Generated) अफैंटेशिया में मानसिक छवियां नहीं बनतीं लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
आपके सामने कोई सेब का नाम लेता है तो सबसे पहले उसकी एक इमेज दिमाग में बन जाती है, उसका रंग, आकार सब नजर आने लगता है, जबकि वह सामने नहीं होता। लेकिन अफैंटेशिया में लोग ऐसा नहीं कर पाते। यह कोई बीमारी या दिमागी समस्या नहीं।
दरअसल यह ब्रेन के काम करने का एक अलग तरीका है। इस आर्टिकल में हम अफैंटेशिया से जुड़े थोड़े और रोचक फैक्ट्स के बारे में जानेंगे। इसमें ब्रेन सोचने या किसी चीज की कल्पना करते समय मेंटल इमेजेस का इस्तेमाल नहीं करता।
यह कोई डिसऑर्डर नहीं है, बल्कि दिमाग के काम करने का तरीका है। जैसे कोई बाएं हाथ से काम करता है तो कोई दाएं हाथ से। एक्सपर्ट्स अफैंटेशिया होने के सही कारणों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं, लेकिन इन वजहों से अफैंटेशिया का प्रभाव हो सकता है: इसका पता लगाने के लिए एक्सपर्ट्स सवालों और जवाबों के एक सेट का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें 16 सवालों को 4 अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया है।
हर सवाल को 1 से 5 के स्केल पर परखा जाता है:
