राष्ट्रवाणी: राजस्थान का मशहूर सरिस्का टाइगर रिजर्व एक अक्टूबर से पर्यटकों के लिए फिर से खुल गया है, जहां मानसून के बाद जंगल सफारी शुरू हो गई है। सरिस्का टाइगर रिजर्व में शुरू हुई जंगल सफारी (Picture Courtesy: Facebook/Sangram Singh Katiyar) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
राजस्थान के मशहूर सरिस्का टाइगर रिजर्व के दरवाजे एक अक्टूबर यानी आज से एक बार फिर से पर्यटकों के लिए खुल गए हैं। मानसून के तीन महीनों के लंबे इंतजार के बाद कोर एरिया में जंगल सफारी फिर से शुरू हो गई है, वन्यजीव प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों में बसे सरिस्का में आप बाघों का दीदार तो कर ही सकते हैं।
साथ ही, यहां के जंगल में आपको और भी काफी कुछ देखने को मिल सकता है। अगर आप भी सरिस्का घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आइए जानें यहां कैसे पहुंचे और कुल खर्च कितना हो सकता है। सरिस्का टाइगर रिजर्व में इस समय कुल 56 बाघ मौजूद हैं, जिनमें 11 टाइग, 18 टाइग्रेस और 27 शावक हैं।
बाघों की इस बड़ी तादाद के कारण यहां के जंगलों में टाइगर साइटिंग की संभावना ज्यादा रहती है। इन बाघों को देखने के लिए यहां पर्यटकों का तांता लगा रहता है। इस सीजन में जाने का सबसे बड़ा फायदा है कि मौसम काफी सुहाना होता है और जानवर भी काफी एक्टिव रहते हैं।
इसलिए सफारी के दौरान कई जानवरों को देखने का मौका मिल सकता है। सरिस्का में सफारी के दौरान आपको बाघ, तेंदुए, हिरण, सांभर, रीसस मकाऊ, चीतल और तरह-तरह के पक्षी देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा, अलवर से सटे बफर जोन में भी बाघिन ST-19 अपने शावकों के साथ कई बार नजर आ चुकी है।
यह बफर जोन साल भर खुला रहता है। इसकी बुकिंग बाला किले गेट के पास से होती है। सरिस्का टाइगर रिजर्व में मंदिर और किला भी हैं।
कोर एरिया में 17वीं शताब्दी का कांकवाड़ी किला बहुत फेमस है। इसके अलावा यहां नीलकंठ महादेव मंदिर भी स्थित हैं। साथ ही, यहां पांडुलोप हनुमान मंदिर भी स्थित है, जिसके बारे में मान्यता है कि वह महाभारत काल से जुड़ा है।
माना जाता है पांडवों ने अपने वनवास का कुछ समय यहां भी बिताया था और इसी जगह पर हनुमान जी ने भीम की परीक्षा ली थी। इस मंदिर की खासियत है कि यहां लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा है, जो काफी कम जगहों पर देखने को मिलती है। जंगल घूमने आए पर्यटक इस मंदिर के दर्शन करने जरूर आते हैं।
धार्मिक आस्था के साथ-साथ ये मंदिर काफी खूबसूरत भी है। इस वजह से लोग इस मंदिर की ओर रुख जरूर करते हैं। सरिस्का के क्षेत्र निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने आशा जताई है कि सरिस्का में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण इस बार टाइगर साइटिंग की संभावना ज्यादा रहेगी, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक खुशखबरी है।
इसके साथ ही, उन्होंने अपील की है कि सफारी के दौरान पर्यटक नियमों का पालन जरूर करें, क्योंकि ये उनकी और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। सफारी के दौरान वाहन से न उतरें, शोर न करें, वन्यजीवों को परेशान न करें, शोर न करें और जंगल में प्लास्टिक या किसी भी तरह का कचरा न फैलाएं। सड़क, वायु और रेलमार्ग, तीनों ही रास्तों से आप आसानी से सरिस्का पहुंच सकते हैं।
अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे सरिस्का पहुंच सकते हैं। 3-4 घंटे में आप आसानी से सड़क के रास्ते सरिस्का पहुंच सकते हैं। जयपुर से इसकी दूरी लगभग 133 कि.मी. है और बाकी दूसरे बड़े शहरों से भी आप आसानी से यहां पहुंच सकते हैं।
वायु मार्ग के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर है, जहां से आप टैक्सी लेकर सरिस्का पहुंच सकते हैं। वहीं, ट्रेन के जरिए आप अलवर जंक्शन पहुंचें और वहां से टैक्सी के जरिए सरिस्का पहुंच सकते हैं। सरिस्का में सफारी के लिए कैंटर और जिप्सी चलती हैं।
एक कैंटर में 20 पर्यटक एक साथ बैठ सकते हैं, जिसका किराया प्रति व्यक्ति लगभग एक हजार रुपए आता है। कोर जोन में 6 लोगों की पूरी जिप्सी बुकिंग का खर्च लगभग 8 हजार रुपए पड़ता है। वन्य अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस साल सरिस्का में पर्यटकों की काफी भीड़ लगेगी।
इसलिए आप सफारी की बुकिंग राजस्थान वन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए कर सकते हैं, ताकि यहां पहुंचने के बाद आपको किसी तरह की परेशानी न हो। सरिस्का में आपको कई खूबसूरत रिसॉर्ट मिल जाएंगे, जिनमें दो लोगों के लिए 2 रातों के स्टे का किराया लगभग 15 हजार के आस-पास पड़ सकता है। इसके अलावा, खाने पीने में 3-4 हजार का खर्च आ सकता है।
दो लोगों के लिए एक शानदार वीकेंड ट्रिप के लिए लगभग 23-25 हजार रुपए का खर्च आ सकता है।
