राष्ट्रवाणी: Kadhai Vs Pressure Cooker Cooking Guide: भारतीय किचन में कढ़ाई एक ऐसा बर्तन है, जो लगभग हर घर में आसानी से मिल जाता है. सब्जी बनाने से लेकर फ्राई करने और मसालों का तड़का लगाने तक, इसका इस्तेमाल कई तरह के खाने में होता है. कढ़ाई का गोल और गहरा आकार इसे बाकी सामान्य पैन से अलग बनाता है. यही वजह है कि इसमें खाना चलाना, भूनना और धीमी आंच पर पकाना आसान होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कढ़ाई का इस्तेमाल सिर्फ सब्जी या फ्राई करने के लिए ही नहीं किया जाता?
सही तरीके से ढककर इसमें कई ऐसी डिश भी पकाई जा सकती हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग प्रेशर कुकर में बनाते हैं. खासकर जब किसी खाने को धीमी आंच पर दम देकर पकाना हो, तो कढ़ाई काफी काम आ सकती है. कढ़ाई में दम देकर खाना पकाने का क्या फायदा? कढ़ाई की गहराई और गोल आकार की वजह से इसमें खाना आसानी से चलाया जा सकता है और गर्मी काफी देर तक बनी रहती है. धीमी आंच पर पकाने से सब्जियों और करी में मसालों का स्वाद अच्छी तरह मिल सकता है. कढ़ाई में खाना पकाते समय अगर इसे सही तरीके से ढक दिया जाए, तो अंदर की गर्मी और भाप काफी हद तक बनी रहती है. इससे खाना धीरे-धीरे पकता है और कई डिश में स्वाद भी अच्छी तरह विकसित होता है. सबसे पहले ऐसी कढ़ाई लें जिसकी गहराई पर्याप्त हो और जिसमें खाना आसानी से पक सके. कढ़ाई को गैस पर रखकर पहले थोड़ा गर्म करें. इसके बाद जरूरत के मुताबिक तेल डालें और मसालों या सब्जियों को भूनना शुरू करें. जब मसाला अच्छी तरह भुन जाए और बाकी सामग्री डाल दी जाए, तो आंच को कम कर दें. अब कढ़ाई को एक सही आकार के ढक्कन से ढक दें. ढक्कन ठीक से बैठना चाहिए, ताकि ज्यादा भाप बाहर न निकले. इसके बाद खाने को धीमी आंच पर पकने दें. बीच-बीच में ढक्कन खोलकर बार-बार देखने से भाप बाहर निकल सकती है, इसलिए जरूरत से ज्यादा ढक्कन न खोलें. अगर डिश में नीचे चिपकने या जलने का खतरा हो, तो बीच में एक बार हल्के हाथ से चला सकते हैं. कढ़ाई में दम देकर कई तरह की भारतीय डिश तैयार की जा सकती हैं. जैसे आलू-गोभी, भिंडी मसाला, चिकन करी, मशरूम मसाला और दूसरी सब्जियों वाली करी. जिन डिश को धीमी आंच पर पकाने की जरूरत होती है, उनमें यह तरीका खास तौर पर उपयोगी हो सकता है. आलू-गोभी जैसी सब्जियों को ढककर पकाने से वे धीरे-धीरे नरम होती हैं. वहीं चिकन या दूसरी करी को धीमी आंच पर पकाने से मसालों का स्वाद अच्छी तरह मिल सकता है. दाल को भी कढ़ाई में पकाया जा सकता है, हालांकि इसमें कुकर की तरह दबाव नहीं बनता. दाल को पकाने के बाद कढ़ाई में ही गर्म तेल या घी में मसालों का तड़का लगाया जा सकता है. कढ़ाई का गोल और गहरा बेस खाना पकाने के दौरान काफी उपयोगी होता है. इसका बेस गर्मी को अच्छी तरह पकड़ता है और गोल किनारों की वजह से सामग्री को चलाना भी आसान रहता है. डीप फ्राई करने के लिए भी कढ़ाई का गहरा सेंटर काफी काम आता है. पूड़ी, पकौड़े और समोसे जैसी चीजें इसमें आसानी से तली जा सकती हैं. वहीं करी या सब्जी बनाते समय इसका गहरा आकार छींटे बाहर आने से भी कुछ हद तक रोकता है. कढ़ाई में खाना पकाते समय इन बातों का रखें ध्यान दम देकर खाना पकाते समय सबसे जरूरी बात आंच का ध्यान रखना है. शुरुआत में सामग्री को भूनने के लिए मध्यम या तेज आंच इस्तेमाल की जा सकती है, लेकिन ढकने के बाद धीमी आंच रखना बेहतर होता है. ज्यादा तेज आंच पर नीचे का खाना जल सकता है. कढ़ाई को जरूरत से ज्यादा न भरें. बहुत ज्यादा सामग्री डालने पर उसे अच्छी तरह चलाना मुश्किल हो सकता है और खाना समान रूप से पकने में समय लग सकता है. अगर कास्ट आयरन की कढ़ाई इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे धीरे-धीरे गर्म करना बेहतर होता है. वहीं नॉन-स्टिक कढ़ाई में धातु के चम्मच या तेज धार वाले बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, ताकि उसकी कोटिंग खराब न हो. कढ़ाई और प्रेशर कुकर में अंतर समझना जरूरी कढ़ाई में ढक्कन लगाकर दम देने से खाना धीमी आंच पर भाप और गर्मी के साथ पकता है. वहीं प्रेशर कुकर में अंदर दबाव बनता है, जिसकी वजह से खाना कम समय में पक सकता है. इसलिए कढ़ाई को प्रेशर कुकर की तरह इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि उसमें कुकर जैसा दबाव बनाया जाए. इसका मतलब है कि ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर खाना पकाने की तकनीक का इस्तेमाल करना. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
