राष्ट्रवाणी: लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति का प्रतीक था, जिन्होंने गरीबी में पले-बढ़े होकर देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री (Picture Courtesy: Instagram) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
2 अक्टूबर के दिन को हम गांधी जयंती के रूप में मनाते हैं, लेकिन इस दिन एक और महान नेता का जन्म हुआ था। लाल बहादुर शास्त्री एक ऐसे नेता थे, जिनका जीवन सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति की मिसाल है। जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले शास्त्री जी जितने विनम्र थे, उनके इरादे उतने ही मजबूत थे।
उनकी 122वीं जयंती के मौके पर आइए जानें देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री का जीवन कैसा था। लाल बहादुर शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय यानी यानी आज के पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर में साल 1904 में हुआ था। उनके पिता का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था और माता का नाम रामदुलारी देवी था।
उनके पिता एक शिक्षक थे, लेकिन जब वे डेढ़ साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। शास्त्री जी की मां एक गृहणी थी और पिता के जाने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ गई। लाल बहादुर शास्त्री का बचपन गरीबी और संघर्षों के बीच बीता।
प्राथमिक शिक्षा के दौरान स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें रोज नदी तैरकर पार करनी पड़ती थी, क्योंकि उनके पास नाव का किराया देने के लिए पैसे नहीं होते थे। लेकिन पैसों की कमी और संघर्षों के सामने शास्त्री जी ने कभी घुटने नहीं टेके। इन मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और काशी विद्यापीठ में दाखिला लिया।
यहां उनके शिक्षक ने उन्हें शास्त्री की उपाधि दी, जिसे आगे उन्होंने अपना सरनेम बनाया और जातिगत भेदभाव मिटाने के लिए श्रिवास्तव उपनाम को नाम से हटा दिया। शास्त्री जी गांधी जी के विचारों से काफी प्रभावित थे। देश की आजादी के लिए गांधी जी के आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने 16 साल की उम्र में अपनी शिक्षा को बीच में छोड़ दिया और असहयोग आंदोलन में शामिल हुए।
इसके बाद नमक सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन जैसे आंदोलनों में उन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शास्त्री जी को लगभग 9 साल जेल में भी बिताने पड़े, लेकिन उनकी देश भक्ति में किसी भी तरह की कमी नहीं आई। जेल में रहते हुए उन्होंने वेस्टर्न फिलॉसोफी और सोशइयोलॉजी की किताबों का अध्ययन किया और कांग्रस के कुशल रणनीतिकार के रूप में उभरे।
शास्त्री जी का राजनीतिक जीवन स्वतंत्रता संग्राम से शुरू हुआ। आजादी के बाद वे उत्तर प्रदेश सरकार में गृह एंव परिवहन मंत्री बने। इसके बाद वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रि मंडल में रेल मंत्री रहे।
इस दौरान हुई एक रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी लेते हुए, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जो उनकी नैतिकता का प्रमाण था। पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने सिर्फ 19 महीने ही काम किया, लेकिन ये भारत के इतिहास का अहम अध्याय रहा।
1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने देश का नेतृत्व किया और सेना का मनोबल बढ़ाया। देश में अन्न के संकट से निपटने के लिए उन्होंने लोगों से एक समय कम खाना खाने की अपील की, जिसकी शुरुआत उन्होंने अपने परिवार से की थी। देश के लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्होंने जय जवान, जय किसान का नारा दिया और हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की नींव रखी।
11 जनवरी 1966 को ताशकंद समझौते पर साइन करने के बाद बहुत ही संदिग्ध परिस्थितियों में उजबेकिस्तान में उनका निधन हो गया। उनकी मौत की वजह दिल का दौरा बताया गया, लेकिन आज भी उनकी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठते रहते हैं।
