राष्ट्रवाणी: Easy Hacks To Drive Nails Into Walls Safely: घर की दीवार पर फोटो फ्रेम, घड़ी, कैलेंडर या कोई दूसरी चीज टांगने के लिए अक्सर कील ठोकनी पड़ती है. लेकिन कई बार कील लगाने की कोशिश में दीवार का प्लास्टर टूट जाता है और आसपास छोटा सा गड्ढा या दरार बन जाती है. खासकर प्लास्टर वाली दीवार पर हथौड़े की तेज चोट पड़ने से ऐसा होने का खतरा ज्यादा रहता है. अगर आपके साथ भी कील ठोकते समय प्लास्टर टूटने की समस्या होती है, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर दीवार को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. दरअसल, दीवार में कील ठोकते समय हथौड़े की चोट का दबाव आसपास के हिस्से पर पड़ता है. इससे प्लास्टर में छोटे-छोटे क्रैक बन सकते हैं. अगर प्लास्टर पहले से कमजोर है या दीवार में नमी की वजह से वह उखड़ रहा है, तो कील ठोकते ही उसका हिस्सा टूटकर बाहर आ सकता है. इसलिए कील लगाने से पहले सही जगह का चुनाव करना बेहद जरूरी है. कील ठोकने से पहले दीवार की जांच करें सबसे पहले उस जगह को ध्यान से देखें जहां कील लगानी है. अगर वहां पहले से दरार, उभरा हुआ प्लास्टर या कोई कमजोर हिस्सा दिखाई दे रहा है, तो उस जगह कील लगाने से बचें. दीवार के कोने और किनारे भी अपेक्षाकृत कमजोर हो सकते हैं, इसलिए वहां सीधे कील ठोकने से प्लास्टर टूटने का खतरा बढ़ सकता है. एक आसान तरीका यह है कि जिस जगह कील लगानी है, वहां उंगलियों के पोर से हल्के हाथ से थपथपाकर देखें. अगर आवाज सामान्य और ठोस सुनाई देती है, तो वह हिस्सा मजबूत हो सकता है. वहीं अगर आवाज काफी खोखली सुनाई दे, तो उस जगह के प्लास्टर के कमजोर होने की संभावना हो सकती है. हर दीवार के लिए एक जैसी कील इस्तेमाल करना सही नहीं है. प्लास्टर या ड्राईवॉल जैसी अपेक्षाकृत नरम सतह के लिए पतली और सामान्य स्टील की कील इस्तेमाल की जा सकती है. वहीं कंक्रीट की दीवार ज्यादा कठोर होती है, इसलिए वहां सामान्य कील ठोकने की कोशिश करने से सतह टूट सकती है या कील ठीक से अंदर नहीं जाएगी. ईंट की दीवार पर भी कील लगाने से पहले सावधानी जरूरी है. जहां संभव हो, ईंट के बीच मौजूद मसाले वाले हिस्से में कील लगाना बेहतर हो सकता है, क्योंकि सीधे ईंट पर तेज चोट करने से वह चटक सकती है. दीवार का प्लास्टर टूटने से बचाने के लिए एक छोटा सा पेंटर टेप भी मददगार हो सकता है. जिस जगह कील लगानी है, वहां टेप का छोटा टुकड़ा चिपका दें और उसके बाद टेप के ऊपर से कील रखें. अब हथौड़े से धीरे-धीरे कील को अंदर करें. टेप सतह को कुछ हद तक स्थिर रखने में मदद कर सकता है और हथौड़े की शुरुआती चोटों के दौरान प्लास्टर के छोटे टुकड़े निकलने की संभावना कम हो सकती है. कील ठोकते समय सबसे आम गलती यही होती है कि लोग शुरुआत से ही हथौड़े से जोरदार वार करने लगते हैं. ऐसा करने से कील अपनी जगह से फिसल सकती है और प्लास्टर पर चोट पड़ सकती है. इसलिए पहली कुछ चोटें बहुत हल्के हाथ से करें. जब कील थोड़ी अंदर चली जाए और अपनी जगह पर स्थिर हो जाए, तभी जरूरत के अनुसार हल्का दबाव बढ़ाएं. हथौड़े को टेढ़ा चलाने के बजाय सीधा रखें और लगातार एक ही दिशा में चोट करें. कील को स्थिर रखने के लिए क्लिप का इस्तेमाल करें शुरुआत में कील को हाथ से पकड़कर हथौड़ा चलाना उंगलियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है. इसके बजाय छोटी क्लिप या कंघी की मदद से कील को शुरुआती चोटों के दौरान स्थिर रखा जा सकता है. इससे कील के फिसलने की संभावना कम होगी और हथौड़े की चोट सीधे कील पर पड़ेगी. ब्रेड का छोटा सा टुकड़ा भी आ सकता है काम कील ठोकते समय उसे शुरुआती दौर में स्थिर रखने के लिए एक घरेलू तरीका ब्रेड के टुकड़े का भी इस्तेमाल करना है. इसके लिए ब्रेड के नरम हिस्से की छोटी-छोटी गोलियां बना लें. इन्हें दीवार की उस जगह पर रखें जहां कील लगानी है. इसके ऊपर कील रखें और फिर बहुत हल्के हाथ से हथौड़ा चलाएं. ब्रेड का नरम हिस्सा शुरुआती कुछ चोटों के दौरान कील को अपनी जगह पर टिकाने में मदद कर सकता है. इससे कील के फिसलने की संभावना कम हो सकती है और दीवार पर अनावश्यक चोट पड़ने से बचा जा सकता है. हालांकि, हथौड़े से बहुत तेज चोट करने के बजाय धीरे-धीरे कील ठोकना ही जरूरी है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं. We use cookies to improve your experience, analyze traffic, and personalize content. By clicking “Allow All Cookies”, you agree to our use of cookies.
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