राष्ट्रवाणी: आर्थिक मंदी के समय लिपस्टिक जैसी छोटी लग्जरी चीजों की बिक्री में काफी बढ़ोतरी होती है। इसे लिपस्टिक इफेक्ट कहा जाता है। महंगाई में बढ़ जाती है लिपस्टिक की सेल (एआई Generated Image) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।

महंगाई बढ़ते ही लोग गाड़ियां, घर, महंगे कपड़े और फॉरेन ट्रिप्स जैसे बड़े खर्चों को टालने लगते हैं। आर्थिक तंगी के कारण ऐसी महंगी चीजों को खरीदना जेब पर काफी भारी पड़ता है, लेकिन मंदी के समय छोटे-मोटे मेकअप प्रोडक्ट्स, जैसे लिपस्टिक या परफ्यूम की बिक्री में काफी उछाल देखने को मिलता है।

इसे लिपस्टिक इफेक्ट कहा जाता है और इसके पीछे कंज्यूमर्स से जुड़ी काफी दिलचस्प साइकोलॉजी छिपी है। आइए जानें क्या है लिपस्टिक इफेक्ट और महंगाई बढ़ने पर लोग ज्यादा लिपस्टिक क्यों खरीदते हैं। लिपस्टिक इफेक्ट एक इकोनॉमिक थ्योरी है, जिसके मुताबिक, जब अर्थव्यवस्था मंदी होती है, तो महंगाई के कारण आम जनता की जेब पर काफी दबाव पड़ता है।

ऐसे समय में लोग बड़ी और महंगी चीजों को खरीदने के बजाय सस्ती चीजों को खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे उन्हें खुशी मिलती है। ये थ्योरी सबसे पहले साल 2001 में एस्टे लॉडर के चेयरमैन लियोनार्ड लॉडर ने दी थी। उन्होंने देखा कि साल 2001 में अमेरिकी आर्थिक संकट के दौरान अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई थी, लेकिन कंपनी की लिपस्टिक की बिक्री में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली।

इसे ही उन्होंने लिपस्टिक इफेक्ट कहा। इसके पीछे सामान्य साइकोलॉजी छिपी है। दरअसल, महंगाई के समय व्यक्ति अपनी लाइफस्टाइल को पूरी तरह से साधारण नहीं बनाना चाहता है।

ब्रांडेड लिपस्टिक या अच्छा परफ्यूम खरीदने से उनकी जेब पर बहुत दबाव भी नहीं पड़ता और उन्हें लग्जरी का एहसास भी होता है। इससे लोगों को अच्छा महसूस होता है कि उन्होंने महंगाई में भी कुछ लग्जरी खरीदी है। दूसरा कारण तनाव और मूड से जुड़ा है।

बढ़ती महंगाई के कारण स्ट्रेस भी बढ़ता है। ऐसे में खुद को अच्छा महसूस करवाने में कोई नई लिपस्टिक या परफ्यूम रिटेल थेरेपी का काम करती है। एक वजह ये भी है कि महंगाई में नया घर या कार खरीदना आम आदमी के लिए काफी मुश्किल होता है।

ऐसे में वो अपना पैसा छोटी-छोटी चीजों पर खर्च करते संतुष्टि महसूस करना चाहता है। लिपस्टिक इफेक्ट का नाम सुनकर ये समझना गलत है कि महंगाई में सिर्फ लिपस्टिक की बिक्री बढ़ती है। आर्थिक मंदी के समय कॉफी, अच्छा फेस वॉश, परफ्यूम, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग एप्स और डाइन आउट्स की मांग भी बढ़ती हैं।

ये चीजें घर या गाड़ी जितनी महंगी नहीं होती, जिससे व्यक्ति को संतुष्टि भी महसूस होती है और उसका बहुत ज्यादा खर्च भी नहीं होता।

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संपादक : नीरज दीवान

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