राष्ट्रवाणी: 1 जनवरी 2027 से नए SIM बाइंडिंग नियम लागू होंगे। साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार का यह कदम। दूरसंचार विभाग (DoT) ने साइबर धोखाधड़ी और भारतीय मोबाइल नंबरों के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए मैसेजिंग ऐप्स को SIM बाइंडिंग से जुड़े निर्देश दिए हैं।
इसके तहत ऐप पर रजिस्टर मोबाइल नंबर से जुड़ी एक्टिव SIM को उस डिवाइस में मौजूद रहना होगा, जिसमें संबंधित ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे आसान भाषा में समझें तो अब उपयोगकर्ता अकाउंट बनाने के बाद सिम कार्ड हटाकर लंबे समय तक उसी अकाउंट का उपयोग नहीं कर सकेंगे। यदि रजिस्टर्ड सिम कार्ड निकाल दिया जाता है, बदल दिया जाता है या डीएक्टीवेट कर दिया जाता है, तो मैसेजिंग ऐप्स उस अकाउंट की सेवाओं को तब कर बंद कर सकता है जबतक वह नंबर दोबारा सक्रिय ना हो जाए।
अभी कई मैसेजिंग ऐप्स में मोबाइल नंबर से एक बार वेरिफिकेशन करने के बाद SIM निकालने पर भी अकाउंट चलता रहता है। लेकिन नए निर्देशों का उद्देश्य इस व्यवस्था को बदलना है। सरकार ने इस नियम को लागू करने के लिए पहले मार्च 2026 तक की समयसीमा रखी थी।
बाद में तकनीकी दिक्कतों और कंपनियों की मांग के चलते इसे बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया। ऐसे में 1 जनवरी 2027 से नए नियमों के लागू होने की तैयारी है। इस नियम के पीछे मुख्य वजह साइबर अपराध पर लगाम लगाना है।
दूरसंचार विभाग के मुताबिक, कुछ साइबर अपराधी भारतीय मोबाइल नंबरों पर अकाउंट बनाकर SIM हटाने या दूसरे स्थानों से उनका इस्तेमाल जारी रखते हैं। ऐसे अकाउंट के जरिए लोगों को फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, निवेश के नाम पर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में निशाना बनाया जा सकता है। SIM बाइंडिंग लागू होने से अकाउंट को एक्टिव SIM से जोड़कर रखना होगा।
इससे जांच एजेंसियों के लिए ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों का पता लगाना आसान हो सकता है और अपराधियों के लिए अकाउंट का गलत इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।

